5.56 mm INSAS LMG basic data

1980 के दशक में यह निर्णय लिया गया कि भारतीय सशस्त्र बलों को आधुनिक हथियारों से लैस किया जाए। इसी योजना के तहत पुराने 7.62 mm हथियारों को 5.56 mm कैलिबर के आधुनिक हथियारों से बदलने की प्रक्रिया शुरू हुई। विभिन्न विदेशी और स्वदेशी वेपन सिस्टम का परीक्षण किया गया।

काफी परीक्षणों और मूल्यांकन के बाद वर्ष 1990 में Indian Small Arms System (INSAS) को अपनाने का निर्णय लिया गया। INSAS प्रोजेक्ट के अंतर्गत तीन प्रकार के हथियार विकसित करने की योजना बनाई गई:

  • राइफल
  • कार्बाइन
  • लाइट मशीन गन (LMG)

हालाँकि प्रारंभिक चरण में कार्बाइन का उत्पादन शुरू नहीं हो सका, लेकिन 1997 में INSAS राइफल और LMG का निर्माण शुरू कर दिया गया। वर्ष 1998 में इन्हें आधिकारिक रूप से भारतीय सेना में शामिल कर लिया गया।

INSAS हथियारों का निर्माण निम्नलिखित ऑर्डनेंस फैक्ट्रियों में किया गया:

इन फैक्ट्रियों ने बड़े पैमाने पर INSAS राइफल और LMG का उत्पादन किया।

चुनौतियाँ

INSAS LMG को सबसे पहले भारतीय रक्षा बलों के लिए तैयार किया गया था। हालांकि शुरुआती दौर में इसे एक आधुनिक और स्वदेशी विकल्प के रूप में देखा गया, लेकिन समय के साथ इसके प्रदर्शन को लेकर कुछ शिकायतें सामने आईं।

विशेष रूप से 1999 के Kargil War के दौरान ऊँचाई वाले (High Altitude) क्षेत्रों में इसके कार्य करने में रुकावटें आईं। अत्यधिक ठंड और कठिन परिस्थितियों में मैगजीन क्रैक होने और फायरिंग में रुकावट जैसी समस्याएँ रिपोर्ट की गईं। इन कारणों से सेना इसके प्रदर्शन से पूरी तरह संतुष्ट नहीं रही।

बाद में दिसंबर 2015 में खबर आई कि Central Reserve Police Force (CRPF) ने भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में INSAS के स्थान पर AK-47 जैसे अधिक भरोसेमंद हथियारों के उपयोग का निर्णय लिया।

सबसे बड़ी खासियत

INSAS सिस्टम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि INSAS राइफल और INSAS LMG के कई मैकेनिकल पार्ट्स लगभग समान डिज़ाइन पर आधारित हैं। आवश्यकता पड़ने पर कुछ हिस्सों को एक-दूसरे में बदला जा सकता है। इससे लॉजिस्टिक सपोर्ट आसान हो जाता है, स्पेयर पार्ट्स का प्रबंधन सरल होता है और फील्ड में मरम्मत (Field Maintenance) भी तेजी से की जा सकती है। यही कारण है कि इसे एक “सिस्टम आधारित हथियार परिवार” (Weapon Family Concept) के रूप में विकसित किया गया था।

प्रमुख कमियाँ

हालाँकि इसके डिजाइन में कई आधुनिक तत्व शामिल किए गए थे, लेकिन कुछ कमियाँ भी सामने आईं:

  1. रफ और टफ परिस्थितियों में मजबूती की कमी
    इसकी बॉडी में उपयोग की गई सामग्री अत्यधिक कठोर सैन्य परिस्थितियों (Extreme Armed Forces Conditions) के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं मानी गई। गिरने या कठोर झटके लगने पर टूट-फूट की शिकायतें सामने आईं।
  2. 3-राउंड बर्स्ट मोड सीमित माना गया
    एक असॉल्ट राइफल के लिए 3-राउंड बर्स्ट मोड कुछ विशेषज्ञों को कम प्रभावी लगा, खासकर उन परिस्थितियों में जहाँ ज्यादा फायर पावर की आवश्यकता होती है।

लोकल पुलिस और लॉ & ऑर्डर ड्यूटी

हालाँकि सेना के लिए यह पूरी तरह संतोषजनक साबित नहीं हुई, लेकिन लोकल पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लिए यह एक हल्का और नियंत्रित फायर देने वाला हथियार माना गया।

  • हल्का वजन
  • कम रिकॉइल (Recoil)
  • कंट्रोल्ड फायर
  • शहरी क्षेत्रों में बेहतर उपयोग

इन कारणों से यह लॉ & ऑर्डर ड्यूटी, दंगा नियंत्रण और सीमित ऑपरेशन के लिए उपयुक्त साबित हुआ।

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INSAS LMG – Question & Answer


1. INSAS LMG का कैलिबर कितना है?

उत्तर: 5.56 mm


2. INSAS LMG की लंबाई बताइए?

उत्तर:
(i) फिक्स्ड बट – 1050 mm
(ii) फोल्डेड बट – 790 mm
(iii) एक्सटेंडेड बट – 1025 mm


3. INSAS LMG का वजन कितना होता है?

उत्तर:

फिक्स्ड बट:
(i) बिना मैगजीन – 6.23 kg
(ii) भरी मैगजीन – 6.73 kg

फोल्डेड बट:
(i) बिना मैगजीन – 5.87 kg
(ii) भरी मैगजीन – 6.37 kg


4. INSAS LMG की खाली मैगजीन का वजन कितना है?

उत्तर: 110 gm


5. INSAS LMG की भरी मैगजीन का वजन कितना है?

उत्तर: 500 gm


6. INSAS LMG की मैगजीन में कितने राउंड आते हैं?

उत्तर: 30 राउंड


7. INSAS LMG के स्टैंडर्ड एवं शॉर्ट बैरल की लंबाई कितनी होती है?

उत्तर:
(i) स्टैंडर्ड बैरल – 535 mm
(ii) शॉर्ट बैरल – 500 mm


8. INSAS LMG की पिच और ग्रूव्स कितने होते हैं?

उत्तर: 200 mm दाहिने ट्विस्ट और 4 ग्रूव्स


9. INSAS LMG का साइटिंग रेडियस कितना है?

उत्तर: 475 mm


10. INSAS LMG की मज़ल वेलोसिटी कितनी होती है?

उत्तर:
(i) स्टैंडर्ड बैरल – 925 मीटर/सेकंड
(ii) शॉर्ट बैरल – 915 मीटर/सेकंड


11. INSAS LMG का साइक्लिक रेट ऑफ फायर कितना है?

उत्तर: 650 राउंड/मिनट


12. INSAS LMG की साइट किस प्रकार की होती है?

उत्तर:
(i) फ्रंट साइट – पोल टाइप
(ii) बैक साइट – एपर्चर टाइप


13. INSAS LMG के बैक साइट पर कितनी रेंज अंकित होती है?

उत्तर: 200 से 1000 मीटर तक


14. INSAS LMG की अधिकतम कारगर रेंज कितनी है?

उत्तर:
(i) स्टैंडर्ड बैरल – 700 मीटर
(ii) शॉर्ट बैरल – 600 मीटर


15. INSAS LMG का ब्रीच ब्लॉक किस सिद्धांत पर लॉक होता है?

उत्तर: रोटेटिंग बोल्ट सिस्टम


16. INSAS LMG किस सिद्धांत पर कार्य करती है?

उत्तर: लॉन्ग स्ट्रोक गैस ऑपरेशन सिस्टम


17. INSAS LMG की रीकॉइल एनर्जी कितनी होती है?

उत्तर:
(i) स्टैंडर्ड बैरल – 2.75 जूल
(ii) शॉर्ट बैरल – 2.87 जूल


18. INSAS LMG से कितने प्रकार के फायर किए जा सकते हैं?

उत्तर: सिंगल शॉट और ऑटोमैटिक


19. क्या INSAS LMG तीन राउंड बर्स्ट फायर कर सकती है?

उत्तर: नहीं, यह सुविधा केवल INSAS राइफल में है।


20. INSAS LMG की मैगजीन किस मटेरियल की बनी होती है?

उत्तर: ट्रांसपेरेंट प्लास्टिक


21. INSAS LMG को फिक्स्ड लाइन पर फायर करने के लिए किस एक्सेसरी का उपयोग किया जाता है?

उत्तर: मोनोपॉड


22. INSAS LMG को ताप, गैस और नमी से बचाने के लिए क्या किया गया है?

उत्तर: क्रोम प्लेटिंग की गई है।


23. INSAS LMG के फ्लैश एलिमिनेटर में कितने होल होते हैं?

उत्तर: 12


24. INSAS LMG के गैस रेगुलेटर में कितनी पोजीशन होती हैं?

उत्तर: दो – लो और हाई


25. INSAS LMG के साथ आने वाले सामान के नाम बताइए?

उत्तर:
(i) मोनोपॉड
(ii) स्लिंग
(iii) ब्लैंक फायरिंग अटैचमेंट (BFA)
(iv) मज़ल कवर
(v) पैसिव नाइट साइट
(vi) डे लाइट टेलीस्कोप


26. INSAS LMG का कार्यचक्र कितने भागों में पूरा होता है?

उत्तर: आठ –
फायर → अनलॉक → एक्सट्रैक्ट → कॉक → इजेक्ट → फीड → लोड → लॉक


27. INSAS LMG के पिस्टन एक्सटेंशन की पीछे कितनी हरकत के बाद अनलॉकिंग की प्रक्रिया पूरी होती है?

उत्तर: 8 mm


28. 100 मीटर रेंज से जीरो करने पर MPI, POA से कहाँ बनता है?

उत्तर: POA से 5 cm ऊपर और 10 cm के व्यास (Diameter) में


29. 100 गज से जीरो करने पर फोर साइट और बैक साइट स्क्रू को एक चक्कर घुमाने पर MPI पर क्या असर पड़ता है?

उत्तर:
(i) फोर साइट – 10 cm ऊपर/नीचे
(ii) बैक साइट – 10 cm दाहिने/बाएँ


30. INSAS LMG का प्रभावी फायरिंग मोड किस प्रकार नियंत्रित किया जाता है?

उत्तर: सेलेक्टर लीवर द्वारा (सेफ, सिंगल और ऑटोमैटिक पोजीशन के माध्यम से)


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